यह लेख डॉ. भरत सोलंकी की व्यक्तिगत यात्रा का वर्णन करता है, जिन्होंने अपनी गंभीर बीमारियों को तप-सेवा-सुमिरन-समर्पण के मानस योग साधना सिद्धांत के माध्यम से सफलतापूर्वक रिवर्स किया। यह कहानी उन लोगों के लिए आशा की किरण है जो बीमारियों से जूझ रहे हैं और एक स्वस्थ, खुशहाल जीवन जीना चाहते हैं। डॉ. सोलंकी का अनुभव यह दर्शाता है कि सही दृष्टिकोण और जीवनशैली में बदलाव के साथ, बीमारियों को रिवर्स करना और अखंड स्वास्थ्य, शक्ति, आनंद, ज्ञान और प्रेम प्राप्त करना संभव है।

डॉ. भरत सोलंकी की तप-सेवा-सुमिरन-समर्पण के मानस योग साधना के माध्यम से बीमारियों को रिवर्स करने की यात्रा

डॉ. भरत सोलंकी की मानस योग साधना के माध्यम से बीमारियों को रिवर्स करने की यात्रा

भरत सोलंकी का अनुभव

क्या आप जानते हैं कि आपकी सेहत से जुड़ी कई समस्याओं का कारण क्या है?

हम सभी अपनी जिंदगी में कभी न कभी बीमारियों, दर्द और शारीरिक परेशानियों से जूझते हैं।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसका मूल कारण क्या हो सकता है?

मेरे जीवन की कहानी भी कुछ ऐसी ही रही है।

स्वास्थ्य समस्याओं के कारण

मेरे जीवन की कहानी भी कुछ ऐसी ही रही है।

मैं एक समय पर तैराकी (Swimming) का कोच था – सक्रिय, ऊर्जावान और खुशहाल।

लेकिन सन 1997 में हुए एक हादसे ने मेरी ज़िंदगी पूरी तरह बदल दी।

रीढ़ की हड्डी (L4-L5) बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई

चक्कर आना राहत चक्र
  • शुरुआत में दो गोलियों से इलाज शुरू हुआ।

  • धीरे-धीरे यह संख्या बढ़कर 50 गोलियों तक पहुँच गई।

  • लगातार अस्पताल, डॉक्टर और टेस्ट…

  • हर दो–तीन महीने में 75 हज़ार रुपये से अधिक का बिल…

15 साल तक मैं दवाओं और दर्द में उलझा रहा।
इन गोलियों ने मेरे शरीर को और बीमार बना दिया –
👉 हाइपर एसिडिटी
👉 कब्ज़ और दस्त
👉 गुस्सा और चिड़चिड़ापन
👉 चक्कर और सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस
👉 बायाँ हाथ पूरी तरह से निष्क्रिय

इतना असहाय हो गया कि बिना सहारे पाँच कदम भी नहीं चल पाता था।
निराशा में, मैंने दो बार आत्महत्या का प्रयास किया… 

परंतु जीवन ने मुझे बचा लिया।

दवाओं के साइड इफेक्ट्स स्वास्थ्य को और बिगाड़ते हैं, जिससे लाचारी होती है

दवाओं के साइड इफेक्ट्स ने मेरी मुश्किलें और बढ़ा दीं। मुझे हाइपर एसिडिटी, कब्ज, और लगातार दस्त की शिकायत रहने लगी। मेरा गुस्सा और चिड़चिड़ापन बढ़ गया। सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के कारण चक्कर आने लगे और मेरा बायां हाथ पूरी तरह से काम करना बंद कर दिया। मैं इतना लाचार हो गया था कि बिना सहारे के पाँच कदम भी नहीं चल पाता था। अस्पताल का बिल हर दो-तीन महीने में 75 हजार से ज़्यादा हो जाता था। मैंने अपनी सारी कमाई डॉक्टरों पर खर्च कर दी। इस निराशा में मैंने दो बार आत्महत्या की कोशिश भी की, पर बच गया।

क्या आप जानते हैं कि एक बीमारी – मुक्त्त जीवन कैसे जिया जा सकता है?

मैं डॉ. भरत सोलंकी (NDDY) Divine Cure Therapist हूं और मुंबई में आरोग्य एवं अध्यात्म शिविर कार्यक्रम 2018 से आयोजित करता हूं, जहां हम तप-सेवा-सुमिरन-समर्पण के मानस योग सिद्धांत का उपयोग करके लोगों को बीमारियों को रिवर्स कर अखंड स्वास्थ्य, शक्त्ति, आनंद, ज्ञान और प्रेम पाने में मदद करते हैं।

बीमारियों से मुक्त जीवन कैसे जिया जाए

मेरी सबसे बड़ी भूल

मुझे यह बाद में पता चला कि “मेरा आहार मेरी बीमारियों का कारण था।”

मेरा आहार: मेरी मौत का कारण था,

मैं अपनी खाने की आदतें आपके साथ साझा करता हूँ ताकि आप समझ सकें कि मैं किस तरह अपनी सेहत खराब कर रहा था:

स्वास्थ्य गिरावट का आहार

सुबह का नाश्ता: सुबह एक बड़ा पटियाला ग्लास भरकर गर्म, ज्यादा उबला हुआ दूध, जिसमें काजू, बादाम, पिस्ता, चारोली, अखरोट, कश्मीरी केसर, इलायची, जायफल जैसे ढेर सारे ड्राई फ्रूट्स डालकर उसे इतना गाढ़ा बनाया जाता था कि चम्मच भी उसमें सीधी खड़ी रहती थी। इसके साथ डेढ़ से दो भाखरी या रोटला और फरसाण (गाठिया, फाफड़ा, खमन, ढोकला, खाखरा, बिस्किट) भी होते थे।

सुबह का नाश्ता में क्या खाना में खा रहा था ! एक विस्तृत विश्लेषण

दोपहर का भोजन: आठ-दस रोटी, दाल, चावल, सब्जी, आचार, पापड़, सलाद, और तीन से चार नंग मिठाई के बिना तो खाना अधूरा लगता था। (मिठाई में गुलाब जाबून, रबड़ी, बासुंदी, मोहनलाल, चूरमा लड्डू, बेसन लड्डू, रवा लड्डू, डींक लड्डू और सभी तरह की मिठाइयाँ।)

दोपहर के भोजन के व्यंजन में क्या खाना में खा रहा था !

शाम का नाश्ता: दो-तीन वड़ापाव, सैंडविच, दाबेली, बिस्किट, और चाय जैसा हल्का-फुल्का नाश्ता।

विविध नाश्ता विकल्प में खा रहा था

रात का भोजन: फिर से दोपहर जैसा भोजन जिसमें आठ-दस रोटी, दाल, चावल, सब्जी, खिचड़ी और भाखरी शामिल थी।

अक्सर का खाना: बीमार होने से पहले हफ्ते में करीब चार बार होटल का खाना-पावभाजी, पुलाव, तंदूरी रोटी, पनीर की सब्जी और बाद में आइसक्रीम, फालूदा, और मिल्कशेक…

बीमारी से पहले भोजन की आदतें

सॉल्यूशन: मुझे ऐसा लगता है...

26 फ़रवरी 2011 को मुझे तप-सेवा-सुमिरन की त्रिस्तरीय मानस योग साधना के बारे में पता चला। मैंने महसूस किया कि भोजन से शक्ति नहीं मिलती, बल्कि उसे पचाने में हमारी जीवनी शक्ति खर्च होती है। मैंने डॉक्टरों पर भरोसा छोड़कर अपने अंतर्ज्ञान पर विश्वास करने का फैसला किया। मैंने तप-सेवा-सुमिरन-समर्पण का रास्ता अपनाया और खुद को ठीक करना शुरू किया।

स्वास्थ्य की ओर यात्रा

इस साधना ने मुझे सिखाया कि हमारा शरीर, जो शायद चार-पांच दशक तक गलत आहार के साथ चल सकता है, एक समय के बाद हार मान लेता है। मैंने अपने आहार को बदलकर सीजनल, रीजनल और ओरिजिनल अमृततुल्य आहार लेना शुरू किया। इस डिटॉक्सिफिकेशन प्रक्रिया ने मुझे अपनी बीमारियों को रिवर्स करने में मदद की।

स्वास्थ्य की ओर यात्रा 2

इससे यह फायदा होगा कि...

आज 2011 के बाद से, मैंने एक भी गोली, कैप्सूल या इंजेक्शन नहीं लिया है। और नाही मैं अस्पताल में भर्ती हुआ हूँ। मेरी सारी बीमारियाँ पाँच महीने के अंदर के समय में ही दूर हो गईं।

स्वास्थ्य की ओर यात्रा (3)

मेरा दिमाग अब साफ है और एकाग्रता बढ़ी है।

मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता

मेरी ऊर्जा का स्तर स्थिर है और रक्त्त शर्करा उत्कृष्ट है।

स्वास्थ्य के स्तंभ

चक्कर आना पूरी तरह बंद हो गए हैं।

चक्कर आना राहत चक्र

सबसे खास बात, मेरा बायां हाथ, जिसे डॉक्टरों ने बेकार घोषित कर दिया था, पूरी तरह से काम करने लगा है।

हाथ की कार्यक्षमता की बहाली का चक्र

मैंने पाँच महीने के अंदर हर बीमारी को रिवर्स किया। मेरा मानना है कि रोग एक है, रोग होने का कारण एक है और उसका इलाज भी एक है।

बीमारी को रिवर्स करना

अब मेरा मिशन 25 लाख लोगों को बीमारी से मुक्त्त कराना है, ताकि एक ऐसा समाज बनाया जा सके जो "वर्ल्ड विदाउट मेडिसिन" के सिद्धांत पर चलता हो।

बीमारियों को उलटकर एक दवा-मुक्त समाज का सशक्तिकरण।

इसी उद्देश्य से, मुंबई में सातवां सात दिवसीय आरोग्य एवं अध्यात्म विकास शिविर 04 -09 अक्टूबर 2025 को जोगेश्वरी, मुंबई में आयोजित हो रहा है, जिसका आप सभी को लाभ लेना चाहिए।

स्वास्थ्य और आध्यात्मिक विकास की ओर यात्रा

इस जानकारी को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मेरी मदद करें। सभी सोशल नेटवर्किंग साइट्स से जुड़ें, Subscribe करें, follow करें, like करें, Comment करें, और अपने परिवारजनों और मित्रगणों के साथ Share करें। आपकी एक Share किसी के लिए बहुत कीमती हो सकती है।

मैं इस जानकारी को कैसे साझा करूँ
जागरूकता फैलाने का चक्र

तो देर किस बात की अभी संपर्क करे... भरत सोलंकी 9821755832"

क्या मुझे भरत सोलंकी से संपर्क करना चाहिए ?
डॉ. भरत सोलंकी की विशेषज्ञता
स्वास्थ्य के लिए एकीकृत दृष्टिकोण

Leave a Reply