सुमिरन – ध्यान और आत्मानुभूति सुमिरन का अर्थ केवल जप या मंत्र नहीं — बल्कि अंतर्मुख होकर आत्मा के वास्तविक स्वरूप से जुड़ना है। ध्यान का सरल अभ्यास दिन में 3–4 बार, 10–20 मिनट के लिए आँख बंद कर शांति से बैठें। कुछ न करें, कुछ न सोचें — केवल जो हो रहा है उसे होने दें। धीरे-धीरे मन का भटकाव कम होगा और स्थिरता आएगी। सुमिरन से अहंकार का आवरण हटता है, बुद्धि में ज्ञान का प्रकाश आता है, और जीवन में एक गहरी संतुष्टि अनुभव होती है।